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सच या झूठǃ इंडिया गेट पर शहीदों के नाम को लेकर भ्रांतियां, क्या है सच्चाई?

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इंडिया गेट के निर्माण और गेट पर खुदे शहीद फौजियों के नामों को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर बहस छिड़ जाती है बहस के दौरान देखा गया है कि लोग एैतिहासिक सच्चाई को दरकिनार करते हुये अफवाहों और झूठ का सहारा लेते हैं। शहीदों के नाम को लेकर अनेकों भ्रांतियां फैली हुई हैं। सच्चाई क्या है। शहीदों के नाम को लेकर किये जा रहे दावे में कितनी सच्चाई है और कितना झूठ आईये इंडिया गेट के इतिहास को जानते हैं। इंडिया गेट का इतिहास दिल्ली पर्यटन विभाग (Delhi Tourism Department) के मुताबिक इंडिया गेट की बुनियाद ड्यूक ऑफ कनॉट (Duke of Connaught) ने 1921 में रखी, इसका डिजाइन एडविन लुटियंस (Edwin Lutyens) ने किया और 10 बरस बाद वायसराय लॉर्ड इरविन (Viceroy Lord Irwin) ने इसका उद्घाटन किया. दिल्ली शहर के बीच मौजूद इंडिया गेट 42 मीटर ऊँचा है इसका निर्माण 1921 में शुरू होकर 1931 में पूरा हुआ। जो राजपथ, नयी दिल्ली में बना हुआ है, राजपथ को पहले किंग्सवे कहा जाता था। गेट पर हज़ारों सैनिकों के नाम, खुदे हैं, लाल और पीले बलुआ पत्थरों से बना हुआ यह स्मारक दर्शनीय है। जब इण्डिया गेट बनकर तैयार हुआ था तब इसके सामने जार्ज ...

आनंदी गोपाल जोशी : भारत की पहली महिला डॉक्टर | Anandibai Gopalrao Joshi (31 March 1865 – 26 February 1887) was one of the earliest Indian female physicians.

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  हमारे देश भारत की पहली महिला डाक्टर के बारे में शायद आपने नहीं सुना होगा आज से तकरीबन 156 बरस पहले पुणे के एक हिंदू ब्राह्मण परिवार मे ं जन्मी आनंदीबाई जोशी जिन्हें भारत की पहली महिला डाक्टर होने का गौरव हासिल है। इतिहास में इनको जो मकाम मिलना चाहिए था उन्हें नहीं मिला यह कहना गलत नहीं होगा कि इस महान महिला के साथ इतिहास ने नाइंसाफी की है और इन्हें इतिहास के पन्नों में दफन कर दिया गया है। Discover Facts & History   Video देखने के लिए Click कीजिए आनंदीबाई जोशी जिनका जन्म 31 मार्च 1865 में पुणे शहर में हुआ थो , जिन्‍होंने भारत में सबसे पहले डॉक्‍टरी की डिग्री हासिल की थी। वह भी उस दौर में जब महिलाओं की बुनियादी शिक्षा भी दूभर थी , ऐसे में विदेश जाकर   डॉक्‍टरी की डिग्री हासिल करना अपने-आप में एक मिसाल है। बताते चलें कि आनंदीबाई जोशी क ी शादी सिर्फ 9 साल की छोटी सी उम्र में उनसे करीब 20 बरस बड़े गोपालराव से करदी गयी थ ी और वह जब सिर्फ 14 बरस की थीं तभी वे माँ बनीं लेकिन उनकी एकलौती औलाद की मौत 10 दिनों में ही  गई । कहीं कहीं पर उनके बच्चे की उम्र ...

CHAURI CHAURA INCIDENT | ABDULLAH | चौरी चौरा कांड | अब्दुल्लाह | गांधी जी | असहयोग आंदोलन

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  अब्दुल्ला चूड़ीहार ही नाम है उस शख़्स का , जिसके नाम पर मशहूर चौरी चौरा का मुख्य मुकदमा अब्दुल्लाह व अन्य बनाम ब्रिटिश हुकूमत के नाम से चला था ।   Discover Facts & History चूड़ी बनाने और पहनाने का काम करने वाले अब्दुल्ला चूड़ीहार को 3 जुलाई 1923 क ी सुबह 6 बजे बाराबंकी जेल में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बग़ावत के जुर्म में फांसी पर लटका दिया गया था। गोरखपुर यूनिवर्सिटी में इतिहास विभाग के डॉ. मनोज तिवारी बताते हैं कि अब्दुल्लाह चौरीचौरा कांड के नायक थे। मुख्य मुकदमा अब्दुल्लाह व अन्य बनाम हुकूमत के नाम से चला था। उस वक्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबा राघव दास ने पंडित मदन मोहन मालवीय को मुकदमा लड़ने के लिए रा ज़ी किया था।   बतौर वकील पंडित मदन मोहन मालवीय की पैरवी से इनमें से 151 क्रांतिकारियों फांसी की सज ़ा से बच गये. बाकी 19 लोगों को 2 से 11 जुलाई 1923 के दौरान फांसी दे दी गई. इस घटना में 14 लोगों को उम्र कैद और 10 लोगों को 8 साल सख्त कारावास की सज ़ा हुई. जिन लोगों को फांसी दी गई , उनकी याद में एक स्मारक भी बनाया गया है।

वो ख़तरनाक शूटर जिससे हिटलर की फ़ौज भी डरती थी, जिसने सिर्फ़ 25 साल की उम्र में वर्ल्ड वार सेकेण्द के दौरान 309 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था.

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Discover Facts & History ये कहानी उस लड़की की है जिसने सिर्फ़ 25 साल की उम्र में वर्ल्ड वार सेकेण्द के दौरान 309 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था जिनमें से ज्यादातर हिटलर के फौजी थे. इस लड़की को इतिहास की सबसे ख़तरनाक और ज़ालिम निशानेबाज़ का दर्जा हासिल है जिसको ल्यूडमिला पेवलीचेंको के नाम से जाना जाता है। इ सने हिटलर और उसके फौजियों का जीना मुश्किल कर दिया था, नाज़ी फौजी इसके नाम से ही थर थर काँपते थे। आइए जानते हैं इस साहसी महिला की कहानी ल्यूडमिला पेवलीचेंको (जुलाई 12, 1916 - अक्टूबर 10, 1974)   वर्ल्ड वार सेकेण्द के वक्त यूक्रेनियन सोवियत स्नाइपर थीं. स्नाइपर बनकर इस महिला ने 309 को मौत के घाट उतारा था. ल्यूडमिला को इतिहास की सबसे कामयाब फीमेल निशानेबाज़ कहा जाता है. कुछ दिन में ही पेवलिचेंको ने हथियार चलाने में महारत हासिल कर ली. 22 जून , 1941 में जर्मनी ने जर्मन-सोवियत के बीच की आक्रमण ना करने की ; ( Treaty ) संधि को तोड़ दिया और ऑपरेशन बारबरोसा शुरू किया. इस ऑपरेशन के तहत जर्मनी ने सोवियत संघ पर अटैक कर दिया. मिलिट्री ट्रेनिंग जंग के हालात को देखते ह...