CHAURI CHAURA INCIDENT | ABDULLAH | चौरी चौरा कांड | अब्दुल्लाह | गांधी जी | असहयोग आंदोलन
अब्दुल्ला चूड़ीहार ही नाम है उस शख़्स का, जिसके नाम पर मशहूर चौरी चौरा का मुख्य मुकदमा अब्दुल्लाह व अन्य बनाम ब्रिटिश हुकूमत के नाम से चला था ।
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चूड़ी बनाने और पहनाने का काम
करने वाले अब्दुल्ला चूड़ीहार को 3 जुलाई 1923 की सुबह 6 बजे बाराबंकी जेल में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बग़ावत के जुर्म में फांसी पर लटका दिया गया था।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में इतिहास विभाग के डॉ. मनोज
तिवारी बताते हैं कि अब्दुल्लाह चौरीचौरा कांड के नायक थे। मुख्य मुकदमा
अब्दुल्लाह व अन्य बनाम हुकूमत के नाम से चला था। उस वक्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
बाबा राघव दास ने पंडित मदन मोहन मालवीय को मुकदमा लड़ने के लिए राज़ी किया था।
बतौर वकील पंडित मदन मोहन मालवीय की
पैरवी से इनमें से 151 क्रांतिकारियों फांसी की सज़ा से बच गये. बाकी 19 लोगों को 2 से 11 जुलाई 1923 के दौरान फांसी दे दी गई. इस घटना में 14 लोगों को उम्र कैद और 10 लोगों को 8 साल सख्त कारावास की सज़ा हुई. जिन लोगों को फांसी दी गई, उनकी याद में एक स्मारक भी बनाया
गया है।



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