आनंदी गोपाल जोशी : भारत की पहली महिला डॉक्टर | Anandibai Gopalrao Joshi (31 March 1865 – 26 February 1887) was one of the earliest Indian female physicians.
हमारे देश भारत की पहली महिला डाक्टर के बारे में शायद आपने नहीं सुना होगा आज से तकरीबन 156 बरस पहले पुणे के एक हिंदू ब्राह्मण परिवार में जन्मी आनंदीबाई जोशी जिन्हें भारत की पहली महिला डाक्टर होने का गौरव हासिल है। इतिहास में इनको जो मकाम मिलना चाहिए था उन्हें नहीं मिला यह कहना गलत नहीं होगा कि इस महान महिला के साथ इतिहास ने नाइंसाफी की है और इन्हें इतिहास के पन्नों में दफन कर दिया गया है।
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बताते चलें कि आनंदीबाई जोशी की शादी सिर्फ 9 साल की छोटी सी उम्र में उनसे करीब 20 बरस बड़े गोपालराव से करदी गयी थी और वह जब सिर्फ 14 बरस की थीं तभी वे माँ बनीं लेकिन उनकी एकलौती औलाद की मौत 10 दिनों में ही गई। कहीं कहीं पर उनके बच्चे की उम्र 14 दिन भी बताई गई है बच्चे की मौत के बाद उन्हें बहुत सदमा लगा। अपनी औलाद को खो देने के बाद उन्होंने यह कसम ली कि वह एक दिन डॉक्टर बनेंगी और ऐसी असमय मौतों को रोकने की कोशिश करेंगी। इस इरादे को पुरा करने में उनके पति गोपालराव ने उनकी हौसला अफज़ाई और मदद की।
आनंदीबाई जोशी की Personality महिलाओं के लिए
Source of
Inspiration है। जब उन्होंने डाक्टरी की पढ़ाई करने का
पक्का इरादा किया था तो समाज में उनकी काफी आलोचना हुई थी कि एक शादीशुदा हिंदू महिला विदेश (पेनिसिल्वेनिया) जाकर डॉक्टरी की पढ़ाई करे। लेकिन
आनंदीबाई अपने इरादे की पक्की थीं और उन्होंने आलोचनाओं
की परवाह नहीं की। यही वजह है कि उन्हें पहली भारतीय महिला डॉक्टर
होने का गौरव प्राप्त हुआ।
1886 के आखिर में, अपनी डाक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद आनंदीबाई भारत लौट आईं, यहाँ उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ।
कोल्हापुर की रियासत ने उन्हें अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल की महिला
वार्ड के चिकित्सक प्रभारी के रूप में नियुक्त किया।
अगले बरस, 26 फरवरी 1887 को आनंदीबाई की 22 साल की उम्र में टी०बी० रोग से मौत हो गई। उनकी मौत पर पूरे भारत में गम मनाया गया। आनंदीबाई जोशी एक हिंदू ब्राह्मण लड़की थी, जो विदेश में शिक्षा प्राप्त करने और मेडिकल की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला थी। यह कड़वी सच्चाई है कि आनंदीबाई जोशी ने जिस मकसद से डॉक्टरी की डिग्री हासिल की थी, उसमें वे पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाईं, लेकिन उन्होंने समाज में वह मकाम हासिल किया, जो आज भी एक मिसाल है।






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