Olympic Medal Ki Qeemat Kya Hai? Kya Aap Medal Khareed Sakte Hain? ओलमंपिक मेडल की कीमत क्या है ? क्या आप मेडल खरीद सकते हैं?
आज के Article में ओलम्पिक मेडल के बारे में कुछ Amazing Facts के बारे में जानने की कोशिश करेंगे।
इस बार के टोक्यो ओलंपिक में कई भारतीय खिलाड़ियों ने ओलंपिक में मेडल जीतकर खुद का और हमारे देश भारत का नाम रोशन किया है।| Discover Facts & History |
क्या आपको मालूम है कि ओलंपिक मेडल हासिल करने के लिए ओलंपियन होना ज़रूरी नहीं हैं आप मेडल खरीद भी सकते हैं। अब सवाल यह है कि गोल्ड, सिल्वर और ब्रोन्ज़ ओलंपिक मेडल्स की क्या कीमत है?
ओलंपिक के हर इवेंट में टाॅप पर रहने वालों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रोन्ज़ मेडल देने का रिवाज सेंट लुइस 1904 ई० के ओलंपिक खेलों से शुरू किया।
ओलंपिक मेडल्स को
डिजाइन करना मेजबान शहर की Organizing Committee
की जिम्मेदारी होती
है। इन मेडल्स का डिजाइन खेलों के हर एक वर्जन के साथ बदलता रहता है। इस साल के मेडल
का डिजाइन जुनिची कवानिशी ने किया है।
हाल ही में बोस्टन के एक नीलामी घर, आरआर ऑक्शन, ने तीन ओलम्पिक मेडल्स की बिक्री की है।
आरआर ऑक्शन के कार्यकारी उपाध्यक्ष (Executive
Vice President) बॉबी लिविंगस्टन के
मुताबिक, "यह एक Unique Collectibles है। जो हाल के वर्षों में
बाजार में आए हैं।"
पेरिस ओलंपिक (1900) में शूटिंग में जीता गया सिल्वर मेडल सिर्फ $1,283 में बेचा गया था। इटली के कॉर्टिना डी'एम्पेज़ो में 1956 के शीतकालीन खेलों से कांस्य
पदक $3,750 हासिल किया गया था।
एथेंस ओलंपिक (1896) में पहली
पोज़ीशन हासिल करने वाला सिल्वर मेडल $180,111 डॉलर में
बेचा गया था। गौरतलब है कि उस समय गोल्ड मेडल नहीं थे।
पूर्व ओलंपियन्स (Former Olympians) ने वित्तीय कठिनाइयों (financial difficulties) का हवाला देते हुए या चैरिटी के लिए रकम जुटाने के लिए अपने मेडल्स बेचे हैं। यू.एस. बास्केटबॉल टीम का नेतृत्व करने वाले बिल रसेल इस साल की नीलामी में 1956 के ओलंपिक से अपना गोल्ड मेडल रखेंगे। इसके अलावा वह अपने एन.बी.ए. चैंपियनशिप रिंग, एक वार्म-अप जैकेट के अलावा कुछ और यादगार चीज़ों को भी बेचने का मन बना रहे हैं। जुटाई गई राशि MENTOR को जाएगी। ये ऑर्गनाईज़ेशन‚ यूथ मेंटरशिप के माैकों को बढ़ावा देती है और बिल रसेल इसके सह-संस्थापक (co-founder) हैं।
आपको जानकर शायद हैरानी होगी कि ओलम्पिक मेडल पर किसी खिलाड़ी का नाम नहीं होता है। नीलामी में शामिल Experts के मुताबिक खेल में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी का नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो जाता है अगर वह चाहे तो मेडल को बेच सकते हैं इससे इतिहास में कोई बदलाव नहीं होगा। न ही मेडल के ऊपर किसी का नाम दर्ज होता है। साथी ही साथ मेडल किस वर्ष में जीता गया है इसके हिसाब से भी मेडल की कीमत लगाई जाती है। कीमत का अंदाज़ा भी इतिहास में दर्ज नाम के मुताबिक ही होता है।
YouTube वीडियो लिंकः Discover Facts & History (DFH)


























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