गणतंत्र दिवस विशेष | ऐ मेरे वतन के लोगों | Aye Mere Watan Ke Logo | 15 August Ka Gana | हिन्दी देशभक्ति गीत | कवि प्रदीप | लता मंगेशकर

 ऐ मेरे वतन के लोगों  / Aye Mere Watan Ke Logo

ऐ मेरे वतन के लोगों एक हिन्दी देशभक्ति गीत है जिसे कवि प्रदीप ने लिखा था और जिसे सी॰ रामचंद्र ने संगीत दिया था। ये गीत 1962 के चीनी आक्रमण के समय शहीद हुए भारतीय सैनिकों को समर्पित था। यह गीत तब मशहूर हुआ जब लता मंगेशकर ने इसे नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के अवसर पर रामलीला मैदान में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं॰ जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में गाया।। चीन से हुए युद्ध के बाद 27 जनवरी 1963 में डेल्ही नेशनल स्टेडियम में स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने दिया था। यह कहा जाता है इस गाने को सुनने के बाद नेहरु जी की आँखें भर आई थीं।



ऐ मेरे वतन के लोगोंतुम खूब लगा लो नारा

ये शुभ दिन है हम सबकालहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा परवीरों ने है प्राण गवाये

कुछ याद उन्हें भी कर लोकुछ याद उन्हें भी कर लो

जो लौट के घर न आयेजो लौट के घर न आये

 

ऐ मेरे वतन के लोगोंज़रा आँख में भर लो पानी

जो शहीद हुए हैं उनकीज़रा याद करो कुर्बानी


 

जब घायल हुआ हिमालयख़तरे में पड़ी आज़ादी

जब तक थी साँस लडे वोफिर अपनी लाश बिछा दी

संगीन पे धर कर माथासो गये अमर बलिदानी

जो शहीद हुए हैं उनकीज़रा याद करो कुर्बानी

 

जब देश में थी दीवालीवो खेल रहे थे होली

जब हम बैठे थे घरों मेंवो झेल रहे थे गोली

थे धन्य जवान वो अपनेथी धन्य वो उनकी जवानी

जो शहीद हुए हैं उनकीज़रा याद करो कुर्बानी

 

कोई सिख कोई जाट मराठाकोई गुरखा कोई मद्रासी

सरहद पर मरनेवालाहर वीर था भारतवासी

जो खून गिरा पर्वतपरवो खून था हिन्दुस्तानी

जो शहीद हुए हैं उनकीज़रा याद करो कुर्बानी

 

थी खून से लथपथ कायाफिर भी बंदुक उठाके

दस दस को एक ने माराफिर गिर गये होश गँवा के

जब अंत समय आया तोकह गये के अब मरते हैं

खुश रहना देश के प्यारोंअब हम तो सफ़र करते हैं

क्या लोग थे वो दीवानेक्या लोग थे वो अभिमानी

जो शहीद हुए हैं उनकीज़रा याद करो कुर्बानी

 

तुम भूल ना जाओ उनको इसलिए कही ये कहानी

जो शहीद हुए हैं उनकीज़रा याद करो कुर्बानी



जय हिंदजय हिंद की सेना

जय हिंदजय हिंद की सेना




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